क्या आपके बच्चों का भविष्य आपकी झूठी शान की बलि चढ़ रहा है : नाक ऊंची रखने की कीमत क्या है ?
हलवाई की कढ़ाई में छनती पूरियाँ, गेंदे के फूलों से सजा शामियाना और वो हज़ारों की भीड़ जो सिर्फ खाना […]
हलवाई की कढ़ाई में छनती पूरियाँ, गेंदे के फूलों से सजा शामियाना और वो हज़ारों की भीड़ जो सिर्फ खाना […]
घर का दरवाजा खुलता है, बेटा चुपचाप अपने कमरे में चला जाता है और आप बस उसकी आंखों में वो
महीने की दस तारीख हुई नहीं कि फोन की घंटी बजती है। दूसरी तरफ कोई दूर का रिश्तेदार या पुराना
त के सन्नाटे में जब अचानक फोन बजता है, तो दिल एक पल के लिए सहम जाता है। मध्यमवर्गीय परिवारों
महीने की आखिरी तारीख आते ही घर का माहौल थोड़ा भारी होने लगता है। बाहर से सब ठीक दिखता है,
दिन भर की थकान के बाद जब आप घर का दरवाजा खोलते हैं, तो क्या आपको सुकून मिलता है या
हमारे समाज में, खास तौर पर उत्तर भारतीय परिवारों में, बड़े बेटे का जन्म सिर्फ एक बच्चे का आना नहीं
आजकल के दौर में, जब हम फेसबुक या इंस्टाग्राम खोलते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हर कोई छुट्टियों पर
आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में, एक ‘अच्छी नौकरी’ केवल आय का साधन नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान का पैमाना बन गई है।
“चाचाजी, प्रणाम!” आपने नोटिस किया होगा कि जब कोई अमीर रिश्तेदार घर आता है, तो पूरा परिवार बिछ जाता है।