7 आसान स्टेप्स: नॉमिनी और वारिस में अंतर समझें ये 3 कानूनी गलतियाँ पड़ेंगी भारी (Nominee aur Waris mein antar)

ज्यादातर लोग बैंक खाता खोलते समय या जीवन बीमा लेते समय एक नाम ‘नॉमिनी’ के तौर पर लिख देते हैं और निश्चिंत हो जाते हैं कि उनके बाद यह पैसा उसी व्यक्ति को मिलेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कानून की नज़र में नॉमिनी और वारिस में अंतर (Nominee aur Waris mein antar) जमीन-आसमान का है?

हो सकता है कि जिसे आपने नॉमिनी बनाया है, वह आपके पैसे का केवल ‘केयरटेकर’ (रखवाला) बनकर रह जाए और असली मालिक कोई और हो। आज के इस विस्तृत लेख में हम समझेंगे कि ये दोनों कौन हैं, कानून क्या कहता है, और आप अपने परिवार को कानूनी लड़ाइयों से कैसे बचा सकते हैं।


नॉमिनी (Nominee) कौन है?

सरल शब्दों में कहें तो नॉमिनी वह व्यक्ति है जिसे आप अपने बैंक, म्यूचुअल फंड या इंश्योरेंस कंपनी को यह निर्देश देने के लिए चुनते हैं कि—”मेरे न रहने पर, आप यह पैसा इस व्यक्ति को सौंप दें।”

  • भूमिका: नॉमिनी एक ‘ट्रस्टी’ या ‘केयरटेकर’ की तरह होता है।
  • कानूनी स्थिति: नॉमिनी पैसे का अंतिम मालिक (Ultimate Owner) नहीं होता। उसका काम सिर्फ बैंक से पैसा लेना और उसे ‘कानूनी वारिसों’ तक पहुँचाना है।

वारिस (Legal Heir) कौन है?

वारिस वह व्यक्ति है जिसका आपकी संपत्ति पर कानूनी रूप से हक होता है। यह हक या तो आपकी ‘वसीयत’ (Will) के जरिए तय होता है, या फिर आपके धर्म के उत्तराधिकार कानून‘ (Succession Laws) के जरिए (जैसे हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम)।

  • भूमिका: वारिस पैसे का ‘असली मालिक’ होता है।
  • कानूनी स्थिति: अगर नॉमिनी और वारिस अलग-अलग व्यक्ति हैं, तो वारिस नॉमिनी से उस पैसे की मांग कर सकता है और नॉमिनी उसे देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।

नॉमिनी और वारिस में अंतर: एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए राजेश ने अपने बैंक खाते में अपने छोटे भाई ‘सुरेश’ को नॉमिनी बनाया। राजेश की मृत्यु के बाद, बैंक वह पैसा सुरेश को दे देगा। लेकिन अगर राजेश की एक पत्नी और बच्चा भी है, तो कानून के हिसाब से वे राजेश के ‘कानूनी वारिस’ हैं।

यहाँ सुरेश (नॉमिनी) को वह पैसा बैंक से तो मिल जाएगा, लेकिन वह उस पैसे को खर्च नहीं कर सकता। राजेश की पत्नी और बच्चा उस पैसे पर दावा कर सकते हैं, और सुरेश को वह पैसा उन्हें सौंपना होगा।


अपवाद: जहाँ नॉमिनी ही मालिक बन जाता है

भारत में दो जगहों पर नॉमिनी को ही अक्सर अंतिम मालिक मान लिया जाता है (हालांकि यहाँ भी कुछ कानूनी बारीकियां हैं):

  1. शेयर्स और डीमैट अकाउंट: कंपनी कानून के तहत, कुछ स्थितियों में नॉमिनी को ही शेयर्स का मालिक माना जा सकता है (जब तक कि वसीयत में कुछ और न लिखा हो)।
  2. इंश्योरेंस (Beneficiary Nominee): अगर आपने अपने माता-पिता, पति/पत्नी या बच्चों को नॉमिनी बनाया है, तो उन्हें अब ‘बेनेफिशियरी नॉमिनी’ कहा जाता है, जिसका मतलब है कि वे ही पैसे के मालिक होंगे।

नॉमिनी और वारिस में अंतर

वसीयत (Will) की अहमियत: सबसे सुरक्षित रास्ता

अगर आप चाहते हैं कि आपके बाद किसी भी तरह का विवाद न हो, तो केवल नॉमिनी बनाना काफी नहीं है। आपको एक वसीयत (Will) तैयार करनी चाहिए।

  • वसीयत यह तय करती है कि आपका ‘वारिस’ कौन होगा।
  • अगर आपके पास वसीयत है, तो वह बैंक के नॉमिनेशन से ऊपर मानी जाती है।

एक मजबूत वित्तीय योजना के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करने के लिए आपको ये 5 कदम उठाने चाहिए:

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स्टेप 1: सभी खातों में नॉमिनेशन अपडेट करें

सुनिश्चित करें कि आपके बैंक अकाउंट, FD, डीमैट अकाउंट और इंश्योरेंस में नॉमिनी का नाम सही है। नॉमिनी वही होना चाहिए जिसे आप ‘वारिस’ भी बनाना चाहते हैं (जैसे पत्नी या बच्चे)।

स्टेप 2: नॉमिनी और वारिस को एक ही रखें

विवादों से बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप अपनी पत्नी या बच्चों को ही नॉमिनी बनाएं और वसीयत में भी उन्हीं का नाम वारिस के तौर पर लिखें।

स्टेप 3: वसीयत (Will) तैयार करें

वसीयत बनाने के लिए वकील की जरूरत नहीं है। आप एक सादे कागज पर अपनी संपत्ति का विवरण लिख सकते हैं और दो गवाहों (Witnesses) के सामने हस्ताक्षर कर सकते हैं। इसे रजिस्टर कराना अनिवार्य नहीं है, लेकिन कराना बेहतर होता है।

स्टेप 4: दस्तावेजों को ‘सुरक्षित और सुलभ’ रखें

दस्तावेज कहाँ रखें, यह बहुत जरूरी है:

  • डिजिटल कॉपी: सभी की स्कैन कॉपी गूगल ड्राइव या डिजी लॉकर (DigiLocker) में रखें।
  • फिजिकल कॉपी: घर में एक ‘इमरजेंसी फाइल’ बनाएं और अपने जीवनसाथी या भरोसेमंद वारिस को उसकी जगह बताएं। उसे बैंक लॉकर में न रखें, क्योंकि मृत्यु के बाद लॉकर खुलवाना मुश्किल होता है।

स्टेप 5: परिवार को शिक्षित करें

उन्हें बताएं कि आपके पास कौन-कौन सी पॉलिसी हैं और नॉमिनी कौन है। नॉमिनी और वारिस में अंतर (Nominee aur Waris mein antar) उन्हें भी समझाएं ताकि वे भविष्य की प्रक्रिया के लिए तैयार रहें।


निष्कर्ष: क्या बेहतर है?

अक्सर लोग पूछते हैं—नॉमिनी बेहतर है या वारिस? जवाब है, दोनों का अपनी जगह महत्व है। नॉमिनी बैंक से पैसा निकालने की ‘चाबी’ है, जबकि वारिस उस पैसे का ‘मालिक’ है।

अगर आप चाहते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई आपके अपनों को बिना किसी कोर्ट-कचहरी के मिले, तो आज ही अपना नॉमिनेशन चेक करें और एक साधारण वसीयत जरूर बनाएं।


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